रांची न्यूज डेस्क: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में आरोपी मनोज कुमार को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। ओएमआर शीट में हेरफेर और पैसों के बड़े लेन-देन से जुड़े इस मामले में वह हाईकोर्ट से जमानत पाने वाले पहले आरोपी हैं। निचली अदालत से याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी तरफ से अधिवक्ता यशवर्धन ने अदालत में पक्ष रखा।
अभ्यर्थियों से लाखों रुपये लेने का आरोप
इस मामले की जांच सीआईडी कर रही है। जांच के दौरान परीक्षा में गड़बड़ी कराने के लिए बड़े पैमाने पर पैसों के लेन-देन की बात सामने आई थी। एजेंसी के मुताबिक, प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए अभ्यर्थियों से पांच लाख रुपये और अंतिम चयन कराने के लिए 30 से 60 लाख रुपये तक लेने की बात तय की गई थी।
अभ्यर्थियों और सिंडिकेट के बीच कड़ी थे मनोज
सीआईडी की जांच में परीक्षा में मनचाहा नतीजा दिलाने के लिए एक संगठित सिंडिकेट के सक्रिय होने का पता चला था। इस नेटवर्क में उमाकांत उरांव, रोशन केरकेट्टा समेत कई अन्य लोगों के शामिल होने का आरोप है। जांच एजेंसी का आरोप है कि मनोज कुमार अभ्यर्थियों और सिंडिकेट के बीच संपर्क कराने का काम करते थे।
स्ट्रॉन्ग रूम से बाहर लाई जाती थीं ओएमआर शीट
जांच के मुताबिक, परीक्षा में नंबर बढ़ाने के लिए स्ट्रॉन्ग रूम से ओएमआर शीट बाहर निकाली जाती थीं। इसके बाद जिन सवालों के जवाब वाले गोले खाली छोड़े गए थे, उन्हें भरकर अभ्यर्थियों के अंकों में बदलाव किया जाता था। सीआईडी ने इस पूरे नेटवर्क की जांच के लिए बैंक खातों के लेन-देन, व्हाट्सऐप चैट और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) को अहम सबूत बनाया था।