रांची न्यूज डेस्क: यह खबर रांची जैसे शहरों में तपती धूप के बीच ड्यूटी कर रहे ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के संघर्ष और प्रशासनिक व्यवस्था की ओर इशारा करती है। 40 डिग्री से अधिक तापमान ने इन जवानों के लिए सड़क पर टिकना मुश्किल कर दिया है।
इस गंभीर स्थिति के मुख्य बिंदुओं को नीचे 4 पैराग्राफ में विस्तार से दिया गया है:
भीषण गर्मी और टूटते तापमान के रिकॉर्ड ने शहर की सड़कों पर तैनात ट्रैफिक जवानों की सेहत पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। पारा 40 डिग्री के पार होने के बावजूद ये जवान बिना धूप के चश्मे और छाते के कड़ी धूप में घंटों खड़े रहने को मजबूर हैं। सुरक्षा उपकरणों के नाम पर उनके पास कुछ भी नहीं है, जिससे उन्हें लू और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) का खतरा बना रहता है। प्रशासनिक उदासीनता के कारण कई चौराहों पर तैनात जवानों को न्यूनतम सुविधाएं भी नसीब नहीं हो रही हैं।
सुविधाओं की बात करें तो पीने के पानी और शौचालय की कमी सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरी है। ड्यूटी के दौरान प्यास बुझाने के लिए जवानों को आसपास के मॉल या होटलों का रुख करना पड़ता है। शौचालय की कमी के कारण महिला पुलिसकर्मियों को सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। दो शिफ्टों में सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक की लंबी ड्यूटी के बीच उन्हें आराम करने या बैठने के लिए सही कुर्सी तक उपलब्ध नहीं कराई गई है।
शहर के अलग-अलग चौराहों पर ट्रैफिक पोस्ट की स्थिति भी काफी दयनीय है। कांटाटोली चौक पर टूटी कुर्सियों की वजह से जवान गिरकर घायल हो रहे हैं, तो रांची यूनिवर्सिटी चौक पर कपड़े का अस्थायी पोस्ट धूप को रोकने में नाकाम है। हालांकि, सुजाता चौक पर बना आधुनिक ट्रैफिक पोस्ट एक उम्मीद की किरण है, जहां पंखा, पानी और बैठने की अच्छी सुविधा दी गई है। यह मॉडल दिखाता है कि अगर प्रशासन चाहे तो जवानों की स्थिति सुधारी जा सकती है।
ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही सभी जवानों को आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। राहत के तौर पर फिलहाल 600 पैकेट ग्लूकोज बांटे गए हैं और अरगोड़ा चौक पर एक नया 'स्मार्ट पोस्ट' बनाने की तैयारी चल रही है। अधिकारियों का मानना है कि जवानों को शारीरिक रूप से फिट रखने के लिए केवल ग्लूकोज काफी नहीं है, बल्कि स्थायी बुनियादी ढांचे और छायादार पोस्ट की सख्त जरूरत है।