रांची न्यूज डेस्क: झारखंड की राजधानी रांची में आदिवासी नेत्री निशा भगत की आत्महत्या के मामले ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। बताया जा रहा है कि घटना से पहले निशा भगत ने फेसबुक पर लाइव आकर कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद उन्होंने पिठोरिया थाना प्रभारी को फोन कर अपनी जान देने की बात कही। सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय स्तर पर अफरा-तफरी मच गई। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
निशा भगत की मौत के बाद बीजेपी के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा कि निशा ने जिन लोगों को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है, उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाना चाहिए। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने भी पुलिस-प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
आदित्य साहू का आरोप है कि निशा भगत ने फेसबुक लाइव के जरिए अपनी परेशानी और आशंकाएं जाहिर की थीं। उनके लाइव वीडियो को बड़ी संख्या में लोगों ने देखा था, लेकिन इसके बावजूद पुलिस समय रहते मौके पर नहीं पहुंची। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस ने तत्परता दिखाई होती तो निशा को बचाया जा सकता था। साहू ने उन्हें संघर्षशील नेत्री बताते हुए कहा कि वह हमेशा अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाती थीं। उन्होंने लाइव वीडियो में जिन लोगों के व्यवहार और बयानों से आहत होने की बात कही थी, उनकी पहचान कर मामले की जांच करने की मांग भी की।
वहीं, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने भी निशा भगत की मौत पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि निशा ने फेसबुक लाइव के दौरान हेमंत सोरेन सरकार और जमीन के कारोबार से जुड़े कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे। सेठ ने कहा कि सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहने वाली एक आदिवासी बेटी को किन हालात से गुजरना पड़ा, यह जांच का विषय है। बीजेपी नेताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग उठाई है।