रांची न्यूज डेस्क: सीपी राधाकृष्णन ने शनिवार को उलिहातु पहुंचकर महान जनजातीय नेता बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का जीवन और बलिदान आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करता है। उपराष्ट्रपति ने वहां बिरसा मुंडा के वंशजों से भी मुलाकात की और उनके योगदान को याद किया।
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि उपराष्ट्रपति पद संभालने के बाद एक बार फिर उलिहातु आना उनके लिए भावुक क्षण है। उन्होंने अपने झारखंड के राज्यपाल कार्यकाल (2023-2024) को याद करते हुए बताया कि शपथ लेने के दिन ही उन्होंने उलिहातु का दौरा किया था, जो उनके जीवन का एक विशेष अनुभव रहा। उन्होंने वर्ष 2021 में नरेंद्र मोदी द्वारा 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ घोषित करने के फैसले को जनजातीय विरासत के प्रति राष्ट्रीय जागरूकता बढ़ाने वाला कदम बताया।
सीपी राधाकृष्णन ने यह भी कहा कि उन्हें नरेंद्र मोदी के साथ खूँटी में पीएम-जनमन योजना की घोषणा के समय मौजूद रहने का अवसर मिला था, जो विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के सशक्तिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत पर गर्व और समुदायों के सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयास ही असली सम्मान हैं।
दिन के दूसरे हिस्से में उपराष्ट्रपति ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट रांची के 15वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया, जहां उन्होंने सात उत्कृष्ट छात्रों को मेडल प्रदान किए। इस कार्यक्रम में कुल 558 विद्यार्थियों को डिग्री दी गई। इससे पहले रांची एयरपोर्ट पर उनका स्वागत संतोष गंगवार, संजय सेठ और सुदिव्य कुमार ने किया।