रांची न्यूज डेस्क: झारखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ी बाधा दूर हो गई है। झारखंड उच्च न्यायालय ने सोमवार को उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें राज्य के तीन प्रमुख बांधों में पांच फ्लोटिंग रेस्टोरेंट (तैरते हुए रेस्तरां) स्थापित करने की निविदा (टेंडर) प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। अदालत के इस फैसले के बाद अब रांची और रामगढ़ के जलाशयों में पर्यटकों को जल्द ही पानी के बीच बैठकर भोजन का आनंद लेने का मौका मिलेगा।
परियोजना का विवरण और विवाद:
राज्य पर्यटन विभाग ने 28 नवंबर, 2025 को रामगढ़ के पतरातू बांध (दो रेस्टोरेंट), रांची के धुर्वा बांध (दो रेस्टोरेंट) और गेतलसूद बांध (एक रेस्टोरेंट) के लिए निविदा जारी की थी। इस प्रक्रिया में वाराणसी की फर्म 'दास एंड कुमार्स कंपनी' सफल बोलीदाता के रूप में उभरी थी। हालांकि, शिरोमणि इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड नामक एक अन्य कंपनी ने निविदा प्रक्रिया में तकनीकी खामियों का आरोप लगाते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
अदालत का फैसला:
मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनिक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिका में कोई ठोस आधार नहीं पाया और उसे खारिज कर दिया। अदालत के इस रुख से अब सरकार के लिए दास एंड कुमार्स कंपनी को काम सौंपने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार ने इन रेस्टोरेंट्स को मई 2026 तक चालू करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा:
इन फ्लोटिंग रेस्टोरेंट्स के शुरू होने से पतरातू और धुर्वा जैसे पर्यटन स्थलों की लोकप्रियता और बढ़ने की उम्मीद है। ये रेस्टोरेंट न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगे, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा करेंगे। सरकार का मानना है कि अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस ये तैरते हुए रेस्तरां झारखंड को देश के पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाएंगे।