रांची न्यूज डेस्क: झारखंड की राजधानी रांची इन दिनों दोहरी मार झेल रही है। एक ओर पारा 42°C के करीब पहुँचने से भीषण गर्मी का प्रकोप है, तो दूसरी ओर शहर के आधे से ज्यादा हिस्से में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। गिरते जल स्तर और सूखते जल स्रोतों ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है।
गहराता जल संकट और वार्डों की स्थिति:
शहर के कई वार्डों में जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। फरवरी तक जहाँ केवल 10 वार्डों में पानी की किल्लत थी, वहीं अब यह समस्या 18 वार्डों (जैसे वार्ड 9, 22-29, 34-39, 49 और 52-55) तक फैल चुकी है। इन क्षेत्रों में या तो पाइपलाइन का काम अधूरा है या फिर जलापूर्ति शुरू ही नहीं हो पाई है।
टैंकरों के भरोसे शहर:
पेयजल की बढ़ती मांग को देखते हुए नगर निगम ने पानी के टैंकरों की संख्या दोगुनी कर दी है। मार्च के अंत तक जहाँ 60 टैंकर चल रहे थे, वहीं अब 120 टैंकरों के जरिए पानी पहुँचाया जा रहा है। इसके बावजूद "नल से जल" योजना के प्रभावी न होने से लोगों की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं।
भूजल स्तर में भारी गिरावट:
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अत्यधिक दोहन के कारण रांची का भूजल स्तर 10 से 25 मीटर तक नीचे चला गया है। इसका सबसे बुरा असर निम्नलिखित प्रमुख इलाकों में देखा जा रहा है:
कांके रोड और हरमू
लालपुर और चुटिया
डोरंडा, अरगोड़ा और हिंदपीढ़ी
प्रशासनिक चुनौती:
नगर निगम प्रतिदिन 311 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति का दावा कर रहा है, लेकिन बढ़ती आबादी और संसाधनों की कमी के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है। प्रशासन टैंकरों के माध्यम से राहत देने की कोशिश कर रहा है, लेकिन पाइपलाइन नेटवर्क और जल संचयन के अभाव में यह संकट आने वाले दिनों में और विकराल हो सकता है।