रांची न्यूज डेस्क: झारखंड की राजधानी रांची इन दिनों केवल भीषण गर्मी की मार ही नहीं झेल रही, बल्कि गहराते जल संकट और दूषित पानी की दोहरी चुनौती का भी सामना कर रही है। झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) और केंद्रीय भूजल बोर्ड की ताजा रिपोर्टों ने शहर की जल स्थिति को लेकर खतरे की घंटी बजा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, भूजल स्तर गिरने के साथ ही इसमें नाइट्रेट, फ्लोराइड और आयरन जैसे खतरनाक रसायनों की मात्रा मानक सीमा से अधिक पाई गई है।
नदियों की बात करें तो रांची की पहचान रही हरमू नदी अब पूरी तरह नाले में तब्दील हो चुकी है। प्रदूषण बोर्ड के अनुसार, इस नदी में 'बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड' (BOD) का स्तर इतना बढ़ गया है कि पानी में ऑक्सीजन लगभग खत्म हो चुकी है, जिससे यह मानवीय उपयोग और जलजीवों के लिए पूरी तरह असुरक्षित है। वहीं, स्वर्णरेखा नदी का हाल भी नामकुम और टाटीसिल्वे जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक कचरे और सीवेज के सीधे बहाव के कारण बदतर हो चुका है।
पानी में बढ़ती रसायनों की मात्रा सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि भूजल में नाइट्रेट का बढ़ा हुआ स्तर बच्चों में 'ब्लू बेबी सिंड्रोम' जैसी जानलेवा बीमारी पैदा कर सकता है। वहीं, फ्लोराइड की अधिकता से हड्डियों और दांतों की बीमारियां (फ्लोरोसिस) होने की आशंका बढ़ गई है। इसके अतिरिक्त, आयरन की अधिक मात्रा भी शरीर के विभिन्न अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।
प्रशासन और पर्यावरणविदों के लिए यह रिपोर्ट चिंता का विषय है, क्योंकि गिरते जलस्तर के कारण लोग भूजल पर अधिक निर्भर हो रहे हैं, जो अब रासायनिक रूप से प्रदूषित हो चुका है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि जल संचयन (Water Harvesting) को अनिवार्य करने और नदियों में कचरा गिरने से रोकने के लिए सख्त कदम उठाए बिना रांची को इस भीषण जल संकट और बीमारियों के जाल से बचाना मुश्किल होगा।