रांची न्यूज डेस्क: झारखंड की राजधानी रांची में फर्जी चैरिटी और समाज सेवा के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले सैनविल श्रीवास्तव और उसके गिरोह के खिलाफ कानून का शिकंजा कस गया है। मांडर थाना क्षेत्र में हुई धोखाधड़ी के मामले में जांच पूरी करते हुए अनुसंधान पदाधिकारी ने अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। अदालत ने इस पर संज्ञान लेते हुए आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े की धाराओं के तहत मामला चलाने की मंजूरी दे दी है।
ठगी का तरीका और पूरा मामला:
यह मामला 29 मार्च 2025 को रश्मि तिर्की द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी से जुड़ा है। मुख्य आरोपी सैनविल श्रीवास्तव, उसके भाई मैनविल श्रीवास्तव और प्रीति सक्सेना ने खुद को यूके स्थित “ग्रे स्टुअर्ट फैमिली फाउंडेशन एलएलसी” का बड़ा अधिकारी बताया था। उन्होंने सेंट अन्ना इंटर कॉलेज, मांडर में लोगों को झांसा दिया कि उनकी संस्था गरीबों को शिक्षा, घर और वाहन मुहैया कराती है। पीड़ितों को बाजार से कम कीमत पर लैपटॉप और बाइक दिलाने का लालच देकर उनसे कुल ₹5,04,636 अलग-अलग खातों में जमा कराए गए और फिर आरोपी चंपत हो गए।
आरोपियों का पुराना आपराधिक इतिहास:
जांच में यह सामने आया है कि इन भाइयों ने ठगी को एक संगठित 'खेल' बना रखा था। सैनविल और मैनविल के खिलाफ सबसे पहले 22 फरवरी 2023 को रांची के सदर थाने में मामला दर्ज हुआ था। इसके बावजूद उनका गिरोह सक्रिय रहा और 10 मार्च 2025 को खेलगांव थाने में सिस्टर निवेदिता ने उनके खिलाफ ₹1.79 करोड़ की ठगी का मामला दर्ज कराया। खेलगांव वाले मामले में आरोपियों पर 100 से अधिक लोगों को शिकार बनाने का आरोप है, जिसमें पुलिस पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
कानूनी स्थिति:
सैनविल श्रीवास्तव वर्तमान में न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है। पुलिस ने अब तक कुल तीन बड़े मामलों में इन आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूतों के साथ चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी है। मांडर मामले में दाखिल चार्जशीट पर कोर्ट के संज्ञान लेने के बाद अब जल्द ही इस मामले में ट्रायल शुरू होगा। पुलिस अन्य पीड़ितों से भी सामने आने की अपील कर रही है ताकि इस गिरोह के खिलाफ और अधिक गवाह जुटाए जा सकें।