रांची न्यूज डेस्क: रांची के उपायुक्त (डीसी) मंजूनाथ भजन्त्री के जनता दरबार में सोमवार को भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया जिसने प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है। नगड़ी अंचल के अंचल अधिकारी (सीओ) राजेश कुमार पर जमीन के म्यूटेशन (नामांतरण) के बदले लाखों रुपये की घूस मांगने का गंभीर आरोप लगा है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि एक ही मामले में रिश्वत की रकम 30 लाख रुपये से शुरू होकर मोलभाव के बाद 9 लाख रुपये तक आ गई थी।
शिकायतकर्ता आनंद सिंह और महेश्वर सिंह के अनुसार, बालालौंग मौजा की 1 एकड़ 5 डिसमिल जमीन के म्यूटेशन आवेदन को सीओ ने पहले खारिज कर दिया और इसे पास करने के बदले 30 लाख रुपये की मांग की। हैरान करने वाली बात यह है कि जब आवेदकों ने एलआरडीसी कोर्ट और एडिशनल कलेक्टर के पास अपील की और वहां से उनके पक्ष में आदेश भी मिल गया, तब भी सीओ ने कथित तौर पर म्यूटेशन के लिए लाखों रुपये की मांग जारी रखी। हार मानकर पीड़ितों ने सीधे जिले के मुखिया के पास न्याय की गुहार लगाई।
जनता दरबार में मामले की सुनवाई करते हुए उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सीओ को जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसे कृत्यों से पूरे प्रशासन की छवि धूमिल होती है। त्वरित कार्रवाई करते हुए डीसी ने सीओ राजेश कुमार, संबंधित सीआई और अंचल कर्मचारी को 'कारण बताओ नोटिस' (Show Cause) जारी कर दिया है। प्रशासन ने इन सभी से अगले 48 घंटों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए।
दूसरी ओर, आरोपी सीओ राजेश कुमार ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए खुद को निर्दोष बताया है। उनका तर्क है कि संबंधित जमीन सीएनटी (CNT) एक्ट के दायरे में आती है, जिसके कारण नियमानुसार म्यूटेशन का आवेदन खारिज किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामला फिलहाल पुनरीक्षण के लिए उच्च अधिकारियों के पास लंबित है। अब प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि यह नियम विरुद्ध म्यूटेशन का मामला है या फिर सत्ता के पद का दुरुपयोग कर अवैध वसूली की कोशिश।