रांची न्यूज डेस्क: झारखंड की राजधानी रांची से महज 20 किलोमीटर दूर स्थित हाहाप पंचायत का कोयरीबेड़ा गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। गांव की तस्वीर विकास के सरकारी दावों पर सवाल खड़े करती है। भीषण गर्मी और 41 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान के बीच ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए रोजाना लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। सिर पर बाल्टी और बर्तन रखकर पगडंडियों से होकर चुआं तक पहुंचना यहां के लोगों की मजबूरी बन चुकी है।
कोयरीबेड़ा गांव में करीब 100 घरों में 500 से अधिक लोग रहते हैं, लेकिन पेयजल, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। सरकार और सीसीएल द्वारा लगाए गए जलमीनार और हैंडपंप वर्षों से खराब पड़े हैं। ऐसे में ग्रामीण पीने के पानी के लिए कुएंनुमा चुआं और नहाने-धोने के लिए डोभा व नदी के दूषित पानी पर निर्भर हैं। यही पानी जानवर भी इस्तेमाल करते हैं, जिससे बीमारियों का खतरा बना रहता है।
गांव की सड़कें भी बदहाल हैं। हाहाप के सरवल से कोयरीबेड़ा होते हुए कई गांवों को जोड़ने वाली सड़क जर्जर हो चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव से पहले सड़क मरम्मत का शिलान्यास तो हुआ, लेकिन काम आज तक शुरू नहीं हुआ। बारु टोली में सड़क और पेयजल की सुविधा पूरी तरह नदारद है। हालात ऐसे हैं कि बीमार पड़ने पर मरीजों को खाट पर लादकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। वहीं बिजली की आपूर्ति भी बेहद खराब है और 24 घंटे में केवल 4 से 5 घंटे ही बिजली मिल पाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि सांसद, विधायक और प्रशासन चुनाव के समय तो गांव पहुंचते हैं, लेकिन समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं होती। मुखिया और ग्राम प्रधान ने भी कई बार खराब हैंडपंप, जलमीनार और सड़क निर्माण के लिए संबंधित विभागों को आवेदन दिया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि विकास के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं, जबकि कोयरीबेड़ा आज भी पानी, सड़क, बिजली और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।