रांची न्यूज डेस्क: झारखंड समेत पूरे उत्तर भारत में 25 मई से नौतपा की शुरुआत हो चुकी है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते ही नौ दिनों तक चलने वाला यह विशेष काल आरंभ होता है, जिसे साल का सबसे गर्म दौर माना जाता है। इस बार नौतपा 2 जून तक रहेगा। मान्यता है कि इन दिनों सूर्य की किरणों का प्रभाव पृथ्वी पर सबसे अधिक पड़ता है, जिसके कारण तापमान तेजी से बढ़ता है और लू चलने लगती है।
ज्योतिषाचार्य कौशल कुमार मिश्रा के अनुसार नौतपा के दौरान भगवान सूर्य की पूजा का विशेष महत्व होता है। इन दिनों सूर्यदेव को जल अर्पित करने, आदित्यहृदय स्तोत्र और सूर्य चालीसा का पाठ करने से शुभ फल की प्राप्ति मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि इस अवधि में दान-पुण्य करने से कई गुना अधिक पुण्य मिलता है।
ग्रामीण परंपराओं और लोक मान्यताओं में नौतपा का संबंध मानसून और खेती से भी जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि जितनी अधिक गर्मी नौतपा में पड़ती है, उतनी ही बेहतर बारिश मानसून के दौरान होने की संभावना रहती है। हालांकि मौसम वैज्ञानिक इसे पूरी तरह वैज्ञानिक आधार पर नहीं मानते, लेकिन भारतीय परंपरा में इसे मौसम चक्र और कृषि से जुड़ा महत्वपूर्ण समय माना जाता है।
इस बार नौतपा के दौरान केवल तेज गर्मी ही नहीं, बल्कि कई इलाकों में आंधी, बवंडर और हल्की बारिश की भी संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि दिन में तेज धूप और शाम के समय मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में लोगों को गर्मी से बचाव के साथ बदलते मौसम को लेकर भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नौतपा में जल दान सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है। सड़क किनारे प्याऊ लगाना, पक्षियों और जानवरों के लिए पानी रखना और जरूरतमंदों को शरबत, पंखा, छाता, चप्पल और सूती कपड़े दान करना बेहद शुभ माना गया है। इसके अलावा गेहूं और चावल का दान भी सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।