रांची न्यूज डेस्क: झारखंड की राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में तीन साल पहले करोड़ों की लागत से बना 'नाइट मार्केट' आज विकास की विफलता और प्रशासनिक अनदेखी का जीवंत उदाहरण बन चुका है। जिस जगह को शाम 6:00 से रात 11:00 बजे तक शहर की रौनक बढ़ाने के लिए तैयार किया गया था, वह आज एक उजाड़ खंडहर में तब्दील हो गई है। नगर निगम ने यहां बैठने के लिए बेंच, खूबसूरत डिजाइनर लैंप और वॉकिंग ट्रैक जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की थीं, लेकिन विडंबना यह है कि यहां आज तक एक भी दुकान नहीं सजी।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की दुर्दशा का आलम यह है कि यहां चोरों और असामाजिक तत्वों का बोलबाला है। खूबसूरती के लिए लगाए गए कीमती डिजाइनर लैंप के बल्ब तो दूर, पूरा का पूरा खंभा ही गायब कर दिया गया है। टहलने के लिए बिछाए गए पेवर्स ब्लॉक उखड़ चुके हैं और वहां सिर्फ बालू नजर आता है। बैठने के लिए बनाई गई सीमेंट की बेंचों को भी या तो तोड़ दिया गया है या लुटेरे उन्हें उखाड़ कर अपने साथ ले गए हैं। करोड़ों रुपये का सार्वजनिक धन आज धूल फांक रहा है।
सुरक्षा के इंतजाम न होने के कारण यह इलाका अब आम नागरिकों, विशेषकर महिलाओं के लिए असुरक्षित हो गया है। शाम ढलते ही यहां नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों के झुंड जमा होने लगते हैं, जिससे अकेले किसी का यहां बैठना नामुमकिन हो गया है। स्थानीय निवासी सुधीर बताते हैं कि कभी इस सौगात को लेकर शहरवासियों में भारी उत्साह था, लेकिन अब यहां की बदहाली देखकर सिर्फ निराशा होती है। प्रशासन द्वारा कई बार नाइट मार्केट शुरू करने की कागजी कोशिशें तो हुईं, लेकिन धरातल पर सब कुछ नाकाम रहा।
वर्तमान में मोरहाबादी का यह हिस्सा किसी लावारिस जगह जैसा प्रतीत होता है, जिसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। उखड़े हुए पिलर, टूटी हुई लाइटें और बिखरे हुए पत्थर रांची नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। करोड़ों खर्च करने के बाद भी जनता को इसका लाभ न मिलना और संपत्तियों की सरेआम चोरी होना यह दर्शाता है कि केवल बुनियादी ढांचा खड़ा कर देना काफी नहीं है, बल्कि उसका रखरखाव और सुरक्षा भी उतनी ही अनिवार्य है।