रांची न्यूज डेस्क: झारखंड में सोमवार रात हुए दर्दनाक विमान हादसे में सातों लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों के मुताबिक, यह मेडिकल इवैक्युएशन विमान ब्लैक बॉक्स (कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर) से लैस नहीं था, जिससे दुर्घटना के कारणों का पता लगाना और चुनौतीपूर्ण हो गया है। नागरिक उड्डयन नियमों के अनुसार 5,700 किलोग्राम से कम वजन वाले विमानों में CVR या FDR अनिवार्य नहीं होते।
हादसे का शिकार हुआ बीच क्राफ्ट C90 किंग एयर रांची से दिल्ली के लिए उड़ान पर था और चतरा जिले के कसारिया इलाके में गिर गया। विमान दिल्ली स्थित रेड बोर्ड एयरवेज Pvt Ltd द्वारा संचालित किया जा रहा था। इसमें एक मरीज संजय कुमार (41), एक डॉक्टर, एक पैरामेडिक, दो सहयोगी और दो पायलट सवार थे। पायलट इन कमांड विवेक विकास भगत के पास लगभग 1,400 घंटे का अनुभव था, जबकि फर्स्ट ऑफिसर सवराजदीप सिंह के पास करीब 450 घंटे का उड़ान अनुभव था। 1987 में निर्मित इस विमान को 2022 में रेडबर्ड एयरवेज ने खरीदा था।
जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या विमान के ऑनबोर्ड वेदर रडार में खराबी के कारण उसने तय मार्ग से घातक विचलन किया। इसी रूट पर पहले एयर इंडिया और इंडिगो की उड़ानों ने खराब मौसम के कारण मार्ग बदलने की अनुमति मांगी थी। बताया जा रहा है कि इंडिगो ने बाईं ओर विचलन मांगा था, जबकि दुर्घटनाग्रस्त विमान ने दाईं ओर जाने की अनुमति ली थी। यह जांच का विषय है कि रडार सही काम कर रहा था या चालक दल ने स्थिति का गलत आकलन किया।
एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की टीम घटनास्थल पर पहुंच चुकी है और मलबे, एटीसी से संवाद तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर जांच की जा रही है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के अनुसार विमान ने शाम 7:11 बजे रांची से उड़ान भरी थी और 7:22 बजे 13,800 फीट की ऊंचाई पर आखिरी रडार संपर्क दर्ज हुआ। 7:34 बजे कोलकाता कंट्रोल से अंतिम रेडियो संपर्क हुआ, जिसके बाद संपर्क टूट गया। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लैक बॉक्स न होने के कारण प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और तकनीकी विश्लेषण ही जांच में अहम भूमिका निभाएंगे।