रांची न्यूज डेस्क: रांची में एलपीजी सिलेंडर की किल्लत अब गंभीर रूप लेती जा रही है। इसका असर घरों से लेकर होटल, रेस्टोरेंट, कॉलेज कैंटीन और संस्थानों तक साफ दिखाई दे रहा है। घरेलू और कॉमर्शियल दोनों तरह के सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने से लोग वैकल्पिक ईंधन जैसे कोयला, लकड़ी और डीजल भट्टी की ओर लौटने लगे हैं। इसका सीधा असर खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर भी पड़ा है, जिससे आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ गया है।
छोटे-बड़े होटल और स्ट्रीट फूड दुकानदार अब मजबूरी में कोयले के चूल्हे या इंडक्शन का इस्तेमाल कर रहे हैं। कई जगहों पर ऐसे व्यंजन बनाना बंद कर दिया गया है, जिनमें अधिक समय या गैस की खपत होती है। इससे होटल कारोबार भी प्रभावित हुआ है और ग्राहकों को सीमित विकल्प ही मिल पा रहे हैं।
एनआईएएमटी (NIAMT) रांची में भी गैस की कमी का असर देखने को मिला है। यहां छह हॉस्टल के करीब 1000 छात्रों के लिए चलने वाली मेस में कॉमर्शियल गैस की सप्लाई बंद हो गई है। ऐसे में कोयले का चूल्हा लगाकर खाना बनाया जा रहा है और मेन्यू में भी बदलाव करते हुए फल, ड्राई फ्रूट्स और मिठाइयों को शामिल किया गया है।
वहीं एनयूएसआरएल (NUSRL) में फिलहाल गैस की पर्याप्त व्यवस्था है, लेकिन भविष्य में संकट से बचने के लिए वैकल्पिक इंतजामों पर विचार किया जा रहा है। यहां करीब 700 छात्र-छात्राएं रहते हैं।
रिम्स (RIMS) और सदर अस्पताल जैसे सरकारी संस्थानों में अभी गैस की सप्लाई बनी हुई है, लेकिन अधिकारियों ने सतर्कता बरतते हुए गैस की बचत और बैकअप स्टॉक बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। सदर अस्पताल के किचन में फिलहाल करीब 8 दिन का गैस स्टॉक उपलब्ध है, जबकि अन्य अस्पतालों में भी 2-3 दिन का स्टॉक सुरक्षित रखा गया है।