रांची न्यूज डेस्क: छह वर्षीय शुभम मुंडा के माता-पिता ने अपने असहनीय दुख को मानवता की मिसाल में बदलते हुए उनके निधन के बाद नेत्रदान का फैसला लिया। शुभम का इलाज राजेंद्र इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (रिम्स), रांची में ब्रेन ट्यूमर के लिए चल रहा था। 13 फरवरी को ऑपरेशन के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी मां डॉली कुमारी ने बताया कि पिछले दो महीनों से शुभम को सिरदर्द की शिकायत थी। कई डॉक्टरों से इलाज कराने के बाद भी 9 फरवरी को उसकी हालत अचानक बिगड़ गई। निजी अस्पताल से रेफर किए जाने पर रिम्स में एमआरआई जांच के बाद ब्रेन ट्यूमर का पता चला। 10 फरवरी को सर्जरी हुई, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके।
शुभम के निधन के बाद रिम्स आई बैंक के काउंसलरों ने माता-पिता से नेत्रदान के लिए संपर्क किया। पेशे से ड्राइवर सुजीत और उनकी पत्नी डॉली कुमारी ने सहमति देते हुए बेटे की कॉर्निया दान कर दी, ताकि किसी और की जिंदगी में उजाला आ सके। डॉली ने कहा, “हमें हमेशा इस बात का दुख रहेगा कि हम अपने बच्चे को बचा नहीं सके, लेकिन सुकून है कि उसकी आंखें किसी और की दुनिया रोशन करेंगी।”
शुभम की दान की गई कॉर्निया से पलामू जिले के 28 वर्षीय युवक और पूर्वी सिंहभूम जिले की 40 वर्षीय महिला को नई रोशनी मिली। राजेंद्र इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज आई बैंक के प्रबंधक अभिमन्यु कुमार ने बताया कि 2018 में आई बैंक की स्थापना के बाद शुभम सबसे कम उम्र के कॉर्निया दाता बने हैं।