रांची न्यूज डेस्क: रांची विश्वविद्यालय से संबद्ध इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज (आईएलएस) में शैक्षणिक ढांचे और मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर मामला शुक्रवार को जस्टिस आनंद सेन की अदालत में उठा। सुनवाई के दौरान उच्च शिक्षा और वित्त विभाग के शीर्ष अधिकारी, जेपीएससी के सचिव, विश्वविद्यालय के कुलपति और संस्थान के डीन व निदेशक मौजूद रहे।
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि स्व-वित्तपोषित संस्थानों के संचालन के लिए एक नई नीति तैयार की जा रही है। यह प्रस्तावित कानून करीब तीन महीनों में लागू हो सकता है, जिसके तहत ऐसे संस्थानों को एक सोसाइटी के जरिए स्वायत्त रूप से संचालित किया जाएगा, ताकि प्रशासनिक कामकाज में सुधार हो सके।
नई व्यवस्था के तहत एक समिति का गठन होगा, जिसमें विश्वविद्यालय और सरकार के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यही समिति शिक्षकों की जरूरत तय करने, उनकी नियुक्ति करने और वेतन निर्धारित करने का अधिकार रखेगी। अदालत ने रांची विश्वविद्यालय से आईएलएस में आवश्यक स्थायी असिस्टेंट प्रोफेसरों की संख्या स्पष्ट करने को कहा है और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने यह भी कहा कि संस्थान में नियमित शिक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य रूप से की जाए और उन्हें यूजीसी मानकों के अनुरूप वेतन दिया जाए। याचिकाकर्ता अंबेश चौबे ने दावा किया है कि संस्थान में लाइब्रेरी, योग्य प्रिंसिपल और अन्य जरूरी संसाधनों की भारी कमी है, जिससे सैकड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। मामले की अगली सुनवाई 6 मई को होगी।